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माँ लक्ष्मी क्यों कहलाती है धन की देवी ? (जानिए उनके परिवार, स्वरूप, व्रत, मंदिर और मंत्रों का रहस्य !)
May 16, 2025
माँ लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है क्योंकि वे सम्पत्ति, वैभव, समृद्धि और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। ‘लक्ष्मी’ शब्द संस्कृत की “लक्ष” धातु से आया है, जिसका अर्थ होता है – “लक्ष्य” या “उद्देश्य”। यह संकेत करता है कि माँ लक्ष्मी जीवन के उन उद्देश्यों को पूर्ण करती हैं, जिनमें सुख, समृद्धि, सौंदर्य और सफलता शामिल हैं।
माँ लक्ष्मी को धन, समृद्धि, और सौभाग्य की देवी माना जाता है। वे प्रेम और सौंदर्य की प्रतीक हैं । हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, जब देवता और दानवों ने समुद्र मंथन किया, तब माँ लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही चारों ओर दिव्यता और संपन्नता का प्रकाश फैल गया। सभी देवता उन्हें प्राप्त करने की आकांक्षा रखने लगे, परंतु उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु को वर के रूप में चुना। उन्हें “श्री“ नाम से भी जाना जाता है। इस घटना ने माँ लक्ष्मी को दिव्य, पूजनीय और धन-वैभव की स्रोत बना दिया।
माँ लक्ष्मी न केवल भौतिक धन#धनकीदेवीलक्ष्मी की प्रतीक हैं, बल्कि वे आध्यात्मिक, मानसिक और पारिवारिक संतुलन का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके आठ रूप – अष्टलक्ष्मी – जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में धन और सौभाग्य की आपूर्ति करते हैं, जैसे कि धन लक्ष्मी (धन), धान्य लक्ष्मी (अन्न), गज लक्ष्मी (शक्ति और ऐश्वर्य), संतान लक्ष्मी (संतान सुख), और विद्या लक्ष्मी (ज्ञान रूपी धन)।
माँ लक्ष्मी की पूजा से व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता और अभाव का नाश होता है। शुक्रवार को उनका विशेष दिन माना जाता है और दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी पूजन का अत्यंत महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहाँ स्वच्छता, श्रद्धा, संयम और सत्य है, वहाँ माँ लक्ष्मी सदा वास करती हैं।
माँ लक्ष्मी का वाहन उल्लू है, जो यह संकेत करता है कि उनकी कृपा विवेकपूर्वक ग्रहण की जाए, अन्यथा धन का दुरुपयोग विनाश का कारण बन सकता है। इस प्रकार, माँ लक्ष्मी को धन की देवी केवल इसलिए नहीं कहा जाता क्योंकि वे धन देती हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे धन को धर्म, संयम और सदाचार के साथ जोड़ने वाली दिव्य शक्ति हैं।
माँ लक्ष्मी जी का परिवार
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी महर्षि भृगु की पुत्री थीं और समुद्र मंथन के दौरान उनका पुनर्जन्म हुआ। उन्होंने विष्णु के हर अवतार में उनके साथ अवतार लिया – जैसे देवी सीता (भगवान राम के साथ) और देवी राधा (भगवान कृष्ण के साथ)।
माना जाता है कि लक्ष्मी माता के 18 पुत्र हैं, जिनके नाम हैं: देवसखा, चिक्लिता, आनंद, कर्दम, श्रीप्रद, जातवेद, अनुराग, संवाद, विजया, वल्लभ, मद, हर्ष, बल, तेजा, दमक, सलिला, गुग्गुल और कुरुंतक।
माँ लक्ष्मी जी की प्रतिमा
देवी लक्ष्मी को कमल के फूल पर बैठे या खड़े हुए दर्शाया जाता है, जिनके चार हाथ होते हैं।
- दो हाथों में कमल के फूल होते हैं।
- एक हाथ से वे वरदान देती हैं (वरद मुद्रा)।
- दूसरे हाथ से वे अभय प्रदान करती हैं (अभय मुद्रा)।
वे लाल वस्त्र और सोने के आभूषण धारण करती हैं। उनके आसपास अक्सर सफेद हाथी दिखाए जाते हैं जो उन्हें जल से अभिषेक करते हैं। उनका वाहन हाथी और उल्लू माने जाते हैं।
माँ लक्ष्मी जी के प्रमुख व्रत और पर्व
- दिवाली लक्ष्मी पूजा
- कोजागरी व्रत
- 16 दिन का महालक्ष्मी व्रत
- वरलक्ष्मी व्रत
- लक्ष्मी जयंती
- लक्ष्मी पंचमी
देवी माँ लक्ष्मी जी के स्वरूप (अवतार)
देवी लक्ष्मी के कई स्वरूप हैं, जिनमें से अष्टलक्ष्मी प्रमुख हैं:
- आदि लक्ष्मी – मूल देवी
- धन लक्ष्मी – धन की वर्षा करने वाली
- धन्य लक्ष्मी – अन्न और भोजन की देवी
- गज लक्ष्मी – शक्ति और ऐश्वर्य देने वाली
- संतान लक्ष्मी – संतान सुख देने वाली
- वीर लक्ष्मी – साहस और पराक्रम की देवी
- विजया लक्ष्मी – विजय दिलाने वाली
- ऐश्वर्य लक्ष्मी – सुख-सुविधाओं की देवी
इनके अतिरिक्त भी देवी लक्ष्मी के अन्य स्वरूप हैं जैसे:
- विद्या लक्ष्मी (ज्ञान की देवी)
- सौभाग्य लक्ष्मी (सौभाग्य की देवी)
- राज्य लक्ष्मी (राज्य और शासन देने वाली)
- वर लक्ष्मी (वरदान देने वाली)
- धैर्य लक्ष्मी (धैर्य और संयम की देवी)
प्रसिद्ध माँ लक्ष्मी जी का मंदिर
- लक्ष्मीनारायण मंदिर, नई दिल्ली
- महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई
- कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर
- श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर
- डोड्डागड्डावल्ली लक्ष्मी मंदिर
- अष्टलक्ष्मी मंदिर, चेन्नई और हैदराबाद
- लक्ष्मी मंदिर, खजुराहो
माँ लक्ष्मी जी के प्रमुख मंत्र
बीज मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥
यह मंत्र माँ लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करने वाला है। इसका नियमित जप आर्थिक उन्नति में सहायक होता है।
महालक्ष्मी मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
यह मंत्र माँ लक्ष्मी के सभी स्वरूपों को समर्पित है और घर में स्थायी समृद्धि लाता है।
लक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥
इस मंत्र के जप से आत्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की उन्नति होती है।
श्री सूक्त मंत्र (ऋग्वेद से)
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
यह मंत्र वेदों से लिया गया है और माँ लक्ष्मी की संपूर्ण स्तुति मानी जाती है।
कुबेर लक्ष्मी मंत्र (धन वृद्धि के लिए)
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन–धान्याधिपतये
धन–धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
यह मंत्र लक्ष्मी और कुबेर दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रभावशाली है।
अष्टलक्ष्मी मंत्र (आठ स्वरूपों की स्तुति)
ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः।
ॐ धनलक्ष्म्यै नमः।
ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः।
ॐ गजलक्ष्म्यै नमः।
ॐ संतानलक्ष्म्यै नमः।
ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः।
ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः।
ॐ ऐश्वर्यलक्ष्म्यै नमः॥
यह मंत्र जीवन के हर क्षेत्र में सुख, सौभाग्य और संतुलन लाने वाला है।
माँ लक्ष्मी हिंदू धर्म में समृद्धि, धन, सौंदर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। महालक्ष्मी जी की उपासना न केवल भौतिक बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करती है। इसलिए, उनके सिद्धांत, स्वरूप और आराधना का महत्व सनातन जीवन शैली में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
“जहाँ माँ लक्ष्मी की कृपा होती है, वहाँ अंधकार नहीं, केवल प्रकाश होता है।”
